|||मुश्तकबिल-ए-ज़िंदगी है फ़ना हो जाना |
अन्जाम-ए-इश्क़ है जुदा हो जाना |
जिंदगी की रवानी ठहेर भी जाए तो क्या ऐ आदम,
तू खुद ही अपनी रूह का रहनुमा हो जाना|||
अन्जाम-ए-इश्क़ है जुदा हो जाना |
जिंदगी की रवानी ठहेर भी जाए तो क्या ऐ आदम,
तू खुद ही अपनी रूह का रहनुमा हो जाना|||
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