Wednesday, September 23, 2020

 जलते चिराग सा हो जाऊं, या की मशाल बन जाऊं,

बहुत दे चुके दूसरों की मिसाल,

अब तो लगता है, खुद ही बेमिसाल बन जाऊं।। 

 इंक़लाब की मशाल जाया हो जाती तो कोई बात न थी,

वो इंक़लाब तो न रहा, सियासी मौकापरस्त काबिज़ हो गए। 

जो कमाई थी मैंने, वो उड़ाई तुमने,

फर्माबरदार हो कर आये थे तुम, न जाने कब हाफिज हो गए।। 

Wednesday, January 15, 2020

|| चरागों को आँखों में महफूज़ रखना,
दूर तक रात ही रात होगी ...
जो तस्सवुर था तुम्हारा सुबह का, वही जज्बात रखना,
रात के बाद सपनों की बात होगी ||  

Monday, January 13, 2020

|| तालिब-इ-इल्म का तवज्जह कुछ और होता तो अच्छा था,
तंज़ीमों ने मुल्क फना करने मक्शूस कर दिया..
जिनको होना था आलिम मुख्तलिफ मौज़ू में,
उनको बेमानी शुगल में मशगूल कर दिया ||