Friday, July 29, 2016

तेरे बेरुखी का शबब है की जिंदगी का शाम हो जाना..
ये मुझपे बेखुदी का असर है कि अIब-ए-हयात का जाम हो जाना ||

Thursday, July 28, 2016

कुछ दोस्त मिले जब अर्सों बाद, चर्चा-इ-इश्क़ का दौर चला |
सबने कहा वो फलां मेहबूब, हमने कहा मेरे भाई तुम,
तुम्हारी दोस्ती, तुम्हारी शफीकी का ख़ुलूस ||

Wednesday, July 27, 2016

लफ़्ज़ों और ख्यालों की नूरा कुश्ती में दोस्त को सलाम कहना भूल गए  |
आज याद आयी थी उनकी कई बार, मशरूफियत में ये पैगाम कहना भूल गए ||