इंक़लाब की मशाल जाया हो जाती तो कोई बात न थी,
वो इंक़लाब तो न रहा, सियासी मौकापरस्त काबिज़ हो गए।
जो कमाई थी मैंने, वो उड़ाई तुमने,
No comments:
Post a Comment