IIक्या कहते हो, कि मैं अकल्मन्द नहीं?
मुशाहिदा नहीं किया, तालीम नहीं ली,
तजुर्बे की कमी है?
कागज़ दिखाऊं, कितना आलिम हूँ?
बुलंद है परवाज़ मेरी आसमान में,
क्या हुआ जो पैरों के निचे ज़मीं नहीं है? II
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